अविनाश चंद्र की खबर

छत्तीसगढ़/पुलिस एक ऐसा शब्द जो कि समाज को सुरक्षा देने के साथ-साथ हर एक स्तर पर अपने आप को एक योद्धा के रूप में काम करता है यदि पुलिस की जमीनी स्तर पर कार्य देखा जाए तो एक मोहल्ला की सुरक्षा से लेकर मंत्रियों तक की सुरक्षा का पूरा जवाबदारी पुलिस विभाग का होता है किंतु छत्तीसगढ़ प्रदेश में वर्तमान परिस्थिति ऐसी चल रही है की समाज को सुरक्षा देने वाली पुलिस कर्मचारी प्रदेश में स्वयं असुरक्षित महसूस कर रहे हैं विगत कुछ महीनों से देखा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में पुलिस के ऊपर हमले हो रहे हैं चाहे वह राजनीतिक व्यक्तियों के द्वारा या फिर रसूखदार बनकर पुलिस को दबाया जा रहा है वही आश्चर्य की बात यह है कि पुलिस महकमे के उच्च अधिकारी भी इस पर शांत होकर बैठे हुए हैं कहा जा सकता है कि अनुशासन और सहनशीलता का प्रतीक छत्तीसगढ़ पुलिस को माना जाता है वही रैंकिंग के आधार पर छत्तीसगढ़ को नंबर वन मांना गया था अभी अंबिकापुर में पुलिस के ऊपर हुए हमले ने पुलिस विभाग को झकझोर कर रख दिया किंतु राजनीतिक दूरी के इर्द-गिर्द ही पूरी कार्यवाही या घूमती रही हाल में ही कोरबा जिले में पुलिस के ऊपर हुए हमले ने प्रदेश सरकार के कार्यों के ऊपर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है जिस प्रदेश की पुलिस ही सुरक्षित नहीं है उस प्रदेश की जनता आखिर किसकी और अपनी सुरक्षा को देखें राजनैतिक दबाव और पकड़ के बीच में पीसकर रह जा रही है छत्तीसगढ़ की पुलिस कई घटनाएं ऐसी होती है जहां पर पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को राजनीतिक पार्टियों के दबाव और पकड़ के बीच अपने आप को असहज महसूस करना पड़ता है वहीं उच्च अधिकारी भी इसी प्रताड़ना के बीच से गुजर रहे हैं सच्चाई सुनने और कहने की दो बातें होती हैं जो सच्चाई कह पाता है वह सच्चाई सुन भी पाता है लेकिन यहां तो ना तो कोई सच्चाई जानना चाहता है और ना ही सुनना चाहता है कहने का पूरा सार यह है *अंधेर नगरी चौपट राजा टका सेर भाजी टका सेर खाजा* वर्तमान सरकार ने पुलिस को महज एक कठपुतली बनाकर रख दिया है पुलिस के कार्यों के ऊपर अनेक प्रकार के अंकुश लगाए जाते हैं छोटी सी छोटी बात पर राजनीतिक दबाव और राजनीतिक रसूख दारी दिखाई जाने लगी है ऐसे में पुलिस विभाग और पुलिस कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक महज एक रोबोट की तरह काम कर रहे हैं पुलिस प्रताड़ना को किस तरह से आज प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में देखा जा रहा है कार्यवाही के नाम पर महज एक खानापूर्ति हो जाती है वही आए दिन पुलिस कर्मियों के ऊपर हो रहे हम लोग पर छत्तीसगढ़ सरकार से लेकर पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी महज एक मूकदर्शक बनकर रह गए हैं पता नहीं इनको किस बात की डर है कि कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं वही मान सम्मान और प्रतिष्ठा को लेकर पुलिस कर्मचारी जहां समाज को असामाजिक तत्वों से सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ अनेक प्रकार की गतिविधियों में अपनी सहभागिता देता है वही पुलिस विभाग के कर्मचारियों के मान सम्मान को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार से लेकर पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी भी मौन व्रत धारण किए हुए हैं ऐसे में छत्तीसगढ़ प्रदेश में हो रहे पुलिस कर्मियों के ऊपर हमलों पर आखिर अंकुश कैसे लगाया जाए यह सोचने वाली बात होगी लेकिन एक बात तय है यदि जल्द ही पुलिस कर्मचारियों के ऊपर हो रहे जानलेवा हमलों पर रोक नहीं लगाया गया तो वह दिन दूर नही है जब छत्तीसगढ़ प्रदेश में आम जनता लॉ एंड ऑर्डर के लिए तरसती नजर आएगी

blitz hindiके साथ जुड़े हर समाचार सबसे पहले और सटीक पाने के लिए | विज्ञापन के लिए संपर्क करेअविनाश चंद्र -8964006304 / 83195220243/रफीक अंसारी पटना कोरिया:-9770277040

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