वर्चुअल संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया।

अविनाश चंद्र की खबर

शुक्रवार को जिले भर में विप्र जनों ने अराध्य देव भगवान परशुराम की जयंती भक्तिभाव से मनाई, सामाजिक जनों ने कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अपने अपने घरों में पूजा अर्चना की इसके साथ ही सामाजिक जनों ने सीमित संख्या में प्रेमाबाग मंदिर परिसर में भगवान परशुराम की पूजा अर्चना की।


प्रेमाबाग मंदिर परिसर में आयोजित एकदम सादे समारोह में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सामाजिक जनों ने भगवान परशुराम के छायाचित्र के समक्ष पूजा अर्चना और दीप प्रज्ज्वलन किया। इस अवसर पर उपस्थित समाज के पूर्व जिलाध्यक्ष जयनाथ बाजपेयी,कार्यकारी जिलाध्यक्ष बृज नारायण मिश्रा, रवीन्द्रनाथ तिवारी, हेमलता शर्मा, राहुल मिश्रा ने भगवान के समक्ष पूजा अर्चना करते हुए महामारी के दौर में सभी की रक्षा करने का प्रार्थना किया। उपस्थित विप्र समाज के कार्यकारी जिलाध्यक्ष बृज नारायण मिश्र ने कहा कि भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम जी को हनुमान जी की तरह चिरंजीव होने का आशीर्वाद प्राप्त है। भगवान शिव ने इनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर इन्हें फरसा दिया था, फरसा को परशु भी कहा जाता है इस वजह से इन्हें भगवान परशुराम के नाम से जाना जाता है। अक्षय तृतीया के दिन जन्म लेने के कारण ही भगवान परशुराम की शक्ति भी अक्षय थी। वे भगवान शिव और विष्णु के संयुक्त अवतार माने जाते हैं,शास्त्रो में उन्हें अमर माना जाता है। भगवान परशुराम का जिक्र महाभारत और रामायण में भी है,वे वीरता और महानता के प्रतीक माने जाते हैं। श्री मिश्रा ने कहा कि भगवान परशुराम ने ब्राह्मण कुल में जन्म लेकर जनकल्याण के लिए कार्य किया हमें उनके आदर्शो पर चलना चाहिए। पूर्व जिलाध्यक्ष जयनाथ बाजपेयी ने कहा कि ब्राह्मण समाज हमेशा समाज की भलाई के लिए त्याग करता रहा है हमें अपने गौरवशाली इतिहास को नही भूलना चाहिए। रविन्द्रनाथ तिवारी ने कहा कि भगवान परशुराम ने उदंड हो चुके राजतंत्र से प्रजा को बचाने के लिए 21 बार युद्ध किया था,लेकिन भगवान परशुराम ने धनुष यज्ञ में भगवान श्रीराम के सद्गुणों को पहचान कर अपने सामाजिक जीवन से सन्यास ले लिया था हमे उनके पदचिन्हों पर चलने की जरूरत है। राहुल मिश्रा ने कहा कि ब्राह्मण हमेशा निःस्वार्थ भाव से सर्व समाज के लिए जीता रहा है आज के परिवेश में हमें भगवान परशुराम के आदर्शों पर चलने की जरूरत है। हेमलता शर्मा ने कहा कि हमारे अराध्य भगवान परशुराम,परशु और पराक्रम के प्रतीक हैं, इसलिए हमें उनके व्यक्तित्व और पराक्रम से सिख लेते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेना चाहिये। ब्राह्मण कभी दुसरो का मोहताज नही रहा है, उसे हमेशा अपने कर्मो पर विश्वास रहा है।
सभी विप्र जनों ने भगवान से मानव जीवन को स्वस्थ रखने और कोरोना महामारी से सभी को मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की।

वर्चुअल संगोष्ठी का हुआ आयोजन- सामाजिक जनों ने जिले भर में प्रातःअपने अपने घरों में भगवान परशुराम की पूजा की वहीं उसके बाद दोपहर में वर्चुअल संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें समाज के पूर्व जिलाध्यक्ष जयनाथ बाजपेयी, कार्यकारी जिलाध्यक्ष बृज नारायण मिश्रा, देवेंद्र तिवारी,हरिकांत अग्निहोत्री, रविन्द्रनाथ तिवारी, हरिनारायण पांडेय, अशोक पांडेय, विनोद तिवारी, रामशंकर मिश्रा.वेद पांडेय, हेमलता शर्मा, योगेंद्र मिश्रा, राहुल मिश्रा, गजानंद पांडेय, कुंजबिहारी मिश्रा, श्यामसुंदर पांडेय, बृजेश त्रिपाठी, डीपी मिश्र, गौरव मिश्रा, प्रणय शर्मा, लल्लू तिवारी, शुभांकर मिश्रा, शास्वत पांडेय नितिन शर्मा, सर्वेश तिवारी, अक्षय ओझा, सुशांत पाण्डेय, कृष्ण गोपाल, अंकित चौबे,शैलेष शुक्ल आदि विप्र शामिल हुए। विप्र जनों ने भगवान परशुराम के जीवन वृतांत को याद करते हुए सामाजिक एकता पर बल देकर उनके पदचिन्हों पर चलने का आह्वान किया। सभी सदस्यों ने अपने अपने विचार व्यक्त करते हुए संगठन की मजबूती पर बल दिया।

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