धीरज कुमार मौर्या की रिपोर्ट

केल्हारी : कोरिया जिले के जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ अंतर्गत ग्राम पंचायत शिवगढ में 03माह से सामुदायिक मवेशी आश्रय में खरीदी जाने वाले गो धन अर्थात गोबर खरीदी जा रही है।उल्लेखनीय है कि,गो धन से स्व सहायता समूह की बहनें कई प्रकार के कलाकृतियों से आर्थिक समृद्धियां प्राप्त कर रहे हैं।वही गौठान समिति भी गोबर खरीदी-बिक्री से आर्थिक सुदृढता प्राप्त करती है।
लेकिन इसके उलट ग्राम पंचायत शिवगढ में मुख्यमंत्री की महत्वकांक्षी योजना का मखौल उडाते एवं शासन के राशियों का बंदरबाट कर अपने में मस्त,अधिकारियों के उदासीनता के कारण 03 माह गोबर खरीदी बीत जाने के बाद भी गौठान में किसी प्रकार का कोई निर्माण कार्य किया जा रहा है। न ही इसका पहल हो रहा है।संवाददाता ने ग्राम पंचायत शिवगढ कार्यालय में पहुंच कारणों की जानकारी लेनी चाही तो संबंधित पंचायत के सरपंच,सचिव,कंम्प्यूटर आपरेटर कार्यालय से नदारद मिले,जब ग्रामीणों से इसकी जानकारी लिया गया तब ग्रामीणों ने बताया कि शिवगढ सचिव रूकमणी पंचायत कार्यालय से 40किलोमीटर दूर जनपद पंचायत मुख्यालय मनेन्द्रगढ के समीपस्थ ग्राम चनवारीडांड में निवास करती है।सप्ताह में एक-दो दिवस ही पंचायत में आती है।जनपद पंचायत कार्यालय मुख्यालय से समीपस्थ ग्राम में ही रहने के कारण वहीं से अधिकतर वरिष्ठ कार्यालय पहुंच कार्यों का सम्पादन करती है।तो वहीं ग्राम पंचायत कार्यालय में कम्प्यूटर सिस्टम भी नही रखा गया है।जिसके संबंध में संवाददाता के पहुचने के बाद कार्यालय सहायक(भृत्य)ने जानकारी देते हुये बताया कि कम्प्यूटर सिस्टम उपसरपंच के घर में है।जबकि कम्प्यूटर आपरेटर अपने घर से ही अपने निजी कम्प्यूटर में कार्य करता है।
कार्यालय से नदारद मिली पंचायत सचिव एवं गौठान समिति सचिव रूकमणी से मोबाईल के माध्यम से संपर्क करने पर उन्होनें गौठान न बनने के कारणों से पल्ला झाड इसका पूरा दोषारोपण वन विभाग पर मढ दिया,हलांकि गोबर खरीदी पंजी में अपना मोबाईल नंबर लिख अधिकारियों से बात कराने की बात कह,गौठान का निर्माण कराने का जिम्मेदार अधिकारी परिक्षेत्र वन सहायक रतौरा अजय कुमार ने स्वयं को बाहर व्यस्त हूं।कह जानकारी देना उचित न समझा,हलांकि शिवगढ गौठान समिति के अध्यक्ष बुद्धेश्वर सिंह ने भी गौठान न बनाने के लिये वन विभाग को जिम्मेदार बताकर तत्काल बनाने की मांग किया।
परंतु सवाल यह है कि,50क्विंटल से अधिक खरीदी हो चुकी गोबर को रखने के लिये न नाडेप है,न ही गोबर से खाद बनाने के लिये अवाश्यक उपाय व व्यवस्था,न ही सुरक्षित रखने के लिये तार से घेराव,यह जरूर है कि इस दौरान ग्रामीण क्रेताओं ने बताया कि 03माह से से गोबर बेच रहे हैं।जिनका भुगतान भी खाते में आ चुका है। परंतु शासन के राशियों का बंदरबाट करते पंचायत विभाग के कर्मचारियों व वन विभाग के अधिकारियों का उच्च अधिकारियों का आंख मूंद लेना संशय को जन्म देता है।

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अविनाश चंद्र -8964006304 / 83195220243/रफीक अंसारी पटना कोरिया:-9770277040

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