चिरमिरी की रीढ़ कहे जाने वाला कोयला खदान प्रबंधन की अनदेखी का हो रही शिकार

कोयला की खदानों पर आश्रित चिरमिरी शहर उजड़ने के कगार पर

अविनाश चंद्र की खबर

कोरिया(चिरमिरी)कोरिया जिले का काले हीरे की नगरी के रूप में कहे जाने वाला शहर चिरमिरी कोयला की खदानों के लिए एक नई पहचान बना चुका शहर आज विरान होने के कगार पर खड़ा है जिसका मुख्य कारण चिरमिरी क्षेत्र की बंद होती खदाने और खदानों के महाप्रबंधक के तानाशाह रवैया का कारण चिरमिरी क्षेत्र में बंद होती खदाने चिरमिरी को विरान करने पर तुले हुये है आपको बता दें कि कोरिया जिले का चिरमिरी शहर जोकि काले हीरे की नगरी और सी कैटेगरी सिटी के रूप में अपना नाम स्थापित करने में सफल हुई है वहीं दूसरी ओर कोरिया जिले का इकलौता नगर पालिक निगम चिरमिरी आज वीरान होने के कगार पर खड़ा हुआ है आपको बता दें कि चिरमिरी शहर की रीड की हड्डी कहे जाने वाला साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड चिरमिरी जो की खुली और बंद खदानों के माध्यम से कोयले का उत्खनन किया जाता था अधिक उत्पादकता को दिखाने के लिए एसीसीएल प्रबंधक कोयले की खदानों का दोहन करते हुए एक तरफ खदानों को बंद करने का मनमाने तरीके से निर्णय लिए हुए हैं इसी क्रम में चिरमिरी क्षेत्र के एनसीपीएच की एक अंडर ग्राउंड खदान आज फिर बंद कर दिया गया वही मजदूर यूनियन और मजदूरों के लाख विरोध करने पर भी उत्पादकता की बात करने वाले महाप्रबंधक खुद आइसोलेशन पर होने की बात कह कर माइंस को भी आइसोलेशन पर भी रख दिया है.


गौरतलब हो कि काले हीरे की नगरी कहे जाने वाली कोरिया जिले का चिरमिरी क्षेत्र का भविष्य को अंधकार करने में जहां साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड चिरमिरी महाप्रबंधक नई खदानों को खोलने के लिए कोई पहल तो करते नहीं हैं लेकिन चल रही कोयले की खदानों को बंद करने में भी कोई कोर कसर छोड़ नहीं रहे हैं जिसका सीधा सीधा प्रभाव चिरमिरी शहर पर पड़ रहा है वही जनप्रतिनिधि भी बंद होती खदानों को लेकर कोई विशेष गंभीर नहीं दिखाई देते हैं जब इस मुद्दे पर एसईसीएल चिरमिरी महाप्रबंधक से मीडिया प्रक्रिया लेना चाहता है तो पी आर ओ की बात करते हुए मीडिया बाइट देने से भी मना कर देते हैं यह चिरमिरी एसईसीएल महाप्रबंधक का मनमाना रवैया ही है जो एक बसे बसाये शहर को वीरान करने पर लगे हुए हैं

अब देखना यह होगा कि चिरमिरी के अस्तित्व और भविष्य पर कॉलरी प्रबंधन का तानाशाह रवैया पर अंकुश कब और कैसे लगेगा यह तो विधाता ही जाने लेकिन एक बात तय है यदि झिमरी के अस्तित्व और भविष्य को बचाना है तो चिरमिरी क्षेत्र में बंद होती खदानों को पुनः चालू कराने के लिए युद्ध स्तर पर लगना होगा

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