(पूर्व महापौर के. डोमरु रेड्डी ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महन्त से हस्तक्षेप हेतु किया आग्रह)

चिरमिरी – कोयलांचल चिरमिरी को पट्टा दिलाने के वायदे को पूरा करने में लगातार संघर्ष कर, कभी नही हो पाने जैसा लगने वाले एक बड़ी माँग को पूरा करने में लगे पूर्व महापौर के. डोमरु रेड्डी ने छतीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महन्त से मुलाकात कर नगरीय क्षेत्रों में अतिक्रमित भूमि व्यवस्थापन व शासकीय भूमि के आबंटन में वर्तमान समय में शासन द्वारा निर्धारित किए 150% के प्रब्याजी कर को समाप्त करने की मांग की है। श्री रेड्डी ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री श्री महन्त से चर्चा करते हुए अपने पत्र में आगे कहा है कि प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद छत्तीसगढ़ में शहरी अतिक्रमणकारी लोगों के लिए बहुप्रतीक्षित पट्टा देने का जो अभिनव योजना कार्यरूप में लाया गया, वह काफी सराहनीय है। इससे प्रदेश के शहरी ऐसे लोग जो बिना राजस्व पट्टा के पीढ़ी दर पीढ़ी 60 – 70 वर्षों से अपने ही मकान में रह रहे हैं, किन्तु मालिकाना हक नहीं होने के कारण संशय में हैं, ऐसे लोगों के लिए वर्तमान कांग्रेस सरकार का यह कदम जनहित में लम्बे समय तक याद किया जाने वाला एक कारगार पहल है। चिरमिरी में पहली बार नजूल अधिकारी कार्यालय ने बक़ायदा रकबा खसरा के साथ नोटिस देने की कार्यवाही प्रारम्भ किया है, लेकिन इसमें लगाए गए 150% के प्रब्याजी पद्धति से लोगों की सहमति नहीं बन पा रही है, क्योंकि राजस्व विभाग द्वारा हमारे क्षेत्र के लोगों के सम्पत्ति का जितना मूल्य आँका गया है, शुल्क जमा करके पट्टा प्राप्त करने के बाद उस ज़मीन या मकान का बाज़ार मूल्य उससे बहुत कम है।

श्री रेड्डी ने अपने पत्र में पट्टा वितरण को लेकर एसईसीएल के शहरी क्षेत्रों में आ रही व्यवहारिक एवं जमीनी दिक्कतों के बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि “एसईसीएल के कोयला खदानों वाले कस्बे में वन एवं राजस्व भूमि से अतिक्रमण कर रहने वाले लोगों में टैक्स न देने की एक प्रचलित परम्परा होती है। इन क्षेत्रों में अतिक्रमण कर रहने वाले ज्यादातर लोग दूसरे प्रदेशों के होते हैं, इसलिए यहाँ काम – धंधा कर अपने स्थाई पैतृक निवास स्थान या पास के दूसरे शहरों में जाकर सेटल हो जाने की भी परम्परा चली आ रही है। साथ ही एसईसीएल के क्षेत्रों में नगर पालिका के मूलभूत सुविधा का बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं रहता, क्योंकि एसईसीएल प्रबंधन उनकी कुछ जरूरतों को पूरा कर देती है इसलिए लोगों में टैक्स देने की इच्छाशक्ति कम हो जाती है।” चूँकि लोकतंत्र में सरकारें जनता के हित मे काम करती रहती है, इसलिए हमारे शहर एवं हम जैसे दूसरे शहरवासियों के लिए पट्टा देने के इस प्रचलित नियम कानूनों में आंशिक संशोधन की आवश्यकता पर जोर देते हुए श्री रेड्डी ने अपने पत्र में आगे कहा है कि उपरोक्त व्यवहारिक दिक्कतों के कारण शासन स्तर पर शहरी आबादी वाले नागरिकों के लिए दिए जाने वाले पट्टा वितरण जैसे अभिनव योजना जिसकी वर्षों से स्वयं जनता को जरूरत थी, इसके क्रियान्वयन में भारी दिक्कतों के साथ-साथ लोगों में शासन के प्रति नाराजगी भी आ रही है, जिसे समय रहते आंशिक संशोधन के साथ ठीक किया जाना आवश्यक है। इससे पहले भी सरगुजा विकास प्राधिकरण में उनके माँग पर छत्तीसगढ़ सरकार ने आदेश जारी किया है, जिससे इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। फलस्वरूप पहली बार लोगों में एक सकारात्मक आस जगी और चिरमिरी में महापौर रहते उन्होंने निरन्तर मेहनत करके पट्टा बाँटने की प्रक्रिया को प्रारम्भ कराने में सफलता भी प्राप्त किया।

अब पुनः इस सम्बंध में नजूल अधिकारी द्वारा जारी नोटिस से लोगों को आ रही परेशानी को समझते हुए चिरिमिरी के पूर्व महापौर के. डोमरु रेड्डी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महन्त से मांग किया है कि प्रचलित 150% के प्रब्याजी जुर्माना/अधिभार का निर्णय हटाने के संबंध में यथोचित कार्यवाही करने की पहल की जाए, जिससे पट्टा वितरण के इस जनोपयोगी योजना का लाभ छत्तीसगढ़ की जनता निर्विरोध रूप से ले कर शासन की ओर से जनता के बीच आ रही इस व्यवहारिक परेशानी को दूर किया जा सके। इससे चिरमिरी एवं चिरमिरी जैसे दूसरे ऐसे शहर जहाँ कोयला खदानों के सिमटते जाने से जनसंख्या में लगातार गिरावट आ रही है, उन्हें स्थायी रूप से बसाकर बचाने की योजना का सपना भी साकार हो सकेगा।

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