बैकुण्ठपुर : पंचायतों में होने वाले समितियों के गठन में फेरबदल-मनमानी एवं सत्ता के बल पर अतिक्रमण किये जाने पर छग शासन के पूर्व संसदीय सचिव श्रीमति चम्पादेवी पावले ने इसे सत्ताधारी दल के विधायकों व प्रदेश सरकार के तानाशाही रवैया एवं ग्राम सभा पर अतिक्रमण कहा है।उन्होनें कहा है कि, त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था में सबसे शक्तिशाली, ग्राम सभा को बनाया गया है।इसकी शक्तियां व अधिकार अक्षुण्य हैं। परंतु क्षेत्रीय विधायकों द्वारा प्रदेश सरकार के शह पर इसमें अपनी मनमानी रवैय्या अख्तियार की जा रही है।जो सत्तारूढ दल के विधायकों सहित प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम सभा के शक्तियों का हनन कर ग्राम सभा को कमजोर बनाने की कुण्ठित मानसिकता है। उन्होनें प्रदेश सरकार के गौठान समितियों को भी ईंगित करते हुये कहा है कि प्रदेश सरकार ने अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को ग्रामीण अर्थव्यवस्था सहायक बताया था।परंतु जमीनी हकीकत में इसके जरिये सत्तारूढ दल के विधायक व सरकार ने निजी स्वार्थ के लिये जो कार्य कर रहे हैं,उससे यह लोग ग्रामीण व्यवस्था विनाशक साबित हो रहे हैं।जिस प्रकार से गौठान समितियों के गठन में ग्राम सभा के अंतिम मुहर लगने के बाद भी सत्तारूढ दल के विधायकों व सरकार द्वारा अनावश्यक अपनी पसंद को थोपना ग्राम सभा के शक्तियों को क्षीण करना है।क्षेत्रीय विधायक,प्रदेश सरकार सहित कांग्रेसी नेताओं न केवल गौठान समिति पर हस्तक्षेप करते हैं,बल्कि पंचायतों में होने वाली सभी समितियों में तानाशाही रवैय्या अख्तियार कर मनमानी करते हैं।
पूर्व संसदीय सचिव श्रीमति पावले जी ने कांग्रेसियों पर धावा बोलते हुये कहा है कि,शासन द्वारा ग्राम पंचायतों में संचालित योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के व्यवस्था व देखरेख के लिये समिति गठन के लिये ग्राम सभा को जिम्मेदारी दी गई है।ग्राम सभा में सर्व सम्मति से समिति के लिये अध्यक्ष सहित सदस्य संख्या जो शासन द्वारा चाही गई अनुसार, गठन कर शासन को प्रस्ताव भेजना है। परंतु कांग्रेसी नेताओं द्वारा स्वयं चयनित कर सभी समितियों जैसे-शिक्षा समिति,निगरानी समिति,सामान्य समिति,गौठान समिति,स्वच्छता समिति आदि सभी समितियों में भी अध्यक्ष एवं सदस्य चयनित कर संबंधित पंचायतों में भेजा जा रहा है।इतना ही नही विधायक कार्यालयों से भी नाम चिन्हित कर अधिकारियों की तैनाती लगा पंचायत के सभी समितियों में पंचायत को इनके अनुसार अनुमोदित के लिये बाध्यता की जाती है।इस तरह के तानाशाही कार्यों से पंचायती राज व्यवस्था का न केवल हनन है,बल्कि पंचायत एवं ग्राम सभा सदस्यों का अपमान भी हो रहा है। सत्तारूढ दल के क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश सरकार को अपनी कुत्सित मानसिकता को काबू रख पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्राम सभा को स्वंतत्र ढंग से कार्य करने देना चाहिये।

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