*तेंदू पत्ता संग्रहण बना ग्रामीणों का रोजगार**

कोरिया/छत्तीसगढ़ प्रदेश विविधता में एकता को संजोए हुए प्राकृतिक धन-धान्य से भरा हुआ है साथ ही इसका वनोपज के क्षेत्र में भी अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाए हुए है छत्तीसगढ़ राज्य का तेंदू वृक्ष अपने आप में एक पहचान बनाए हुए हैं जहां इसका फल एक तरफ खाने के काम में आता है वहीं दूसरी तरफ इसके पत्ते से ग्रामीण क्षेत्रों और वनांचल क्षेत्रों के लोगों को प्रत्येक वर्ष एक प्रकार का रोजगार का साधन बनने में मील का पत्थर साबित हुआ है वही तेंदू के पत्तों को छत्तीसगढ़ शासन अपने अनेक माध्यमों से एकत्रित करा कर ग्रामीणों और वनांचल क्षेत्र के लोगों को रोजगार मुहैया कराता है जिसके लिए वन विभाग की देखरेख के साथ ठेकेदारी प्रथा से तेंदू के पत्तों को छत्तीसगढ़ शासन पूरे प्रदेश में खरीददारी करती है ऐसे में कोरिया जिला के अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुतायत मात्रा में तेंदू के वृक्ष पाए जाते हैं इन वृक्ष के पत्तों को शासन खरीद कर बीड़ी बनाने वाली कंपनियों को बेचती है वर्तमान समय में जहां लॉक डाउन और धारा 144 लागू है ऐसे में कोरिया जिला के साथ छत्तीसगढ़ के अन्य जिले के ग्रामीणों और वनांचल क्षेत्र के लोक तेंदू के पत्ते को एकत्रित कर उन्हें तेंदूपत्ता संग्रहालय केंद्र पर शासन के नियमानुसार मूल्यों पर जमा कर रहे है कोरिया जिला के अंतर्गत आने वाले अनेक ऐसे क्षेत्र गांव कस्बे पाए जाते हैं जहां वन क्षेत्र होने के साथ तेंदू के वृक्ष बहुतायत मात्रा में पाए जाते हैं ऐसे में वहां के लोगों को आसानी से रोजगार मुहैया हो जा रहा है साथ ही इस कार्य में जहां पुरुष के साथ सर्वाधिक महिलाएं अग्रिनी भूमिका निभाते हुए इस कार्य को प्रमुखता से कर रही हैं

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