(बस्सु) रफ़ीक अंसारी/ कोरिया/


पटना।पूरा जिला सिर्फ रेत-रेत कह रहा और नदी अपना अस्तित्व खो रहा है, रखवाली करने वाले खनिज बेजुबान है, पुलिस ठेकेदार के ईशारों में परेशान है वहीं आवज बुलंद करने वाले प्रतिमाह दो हजार में सिमटे है। विपक्ष भी ठेकेदार के रसूख के आगे नतमस्तक है। लोग यह आरोप लगा रहे है कि जितना रेत निकालने के लिये ठेका दिया गया था उससे ज्यादा रेत निकल चुका है अब ठेकेदार पर्ची के साथ अलग-अलग रंगो में खेल कर रहे है। रेत उठ़ रहा है पर्ची कट रही है पर वह पर्ची वह नहीं है जो शासन को राजस्व दे। यह पर्ची वह है जो ठेकेदार की जेब भर रही है।
कोरिया जिला में जब से कांग्रेस की सरकार आयी है तब से पूरे नदियों का निजीकरण कर ठेका प्रथा की शुरूआत कर दी है जिससे पूरे राज्य सहित जिले में रेत की किमत सीधे दोगुनी हो गयी और के खदानों को ठेका लेकर ठेकेदार मालामाल हो गये। हो हल्ला करते-करते जनता भी अब शांत होती दिखने लगी है। पर इस शांति के बीच भी जो चल रहा है वह भी कियी से छुपा नहीं है रेत बिक रहा है पर रेत से खनिज को मिलने वाली राॅयल्टी कलरफूल पर्चीयों की आड़ में चोरी हो रही है। पर विभाग खनिज आंख मूंदे बैठा है। रेत लोग जरूरत के अनुसार खरीद रहे है और रेत का पैसा भी ठेकेदार को दे रहे है पर उस पैसे के एवज में पीट पास की रसीद नहीं स्टीमिट रकम की रसीद मिल रही है जिससे साफ तौर पर रेत की राॅयल्टी की चोरी खुलेआम देखने को मिल रही है। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि उस पर्ची पर खनिज विभाग वाहनों को पकड़ने के बाद छोड़ देता है क्योंकि यह पर्ची किसी और की नहीं बल्की ठेकेदार की दी होती है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार को जितना रेत निकालने की अनुमति मिली थी उतना तो ठेकेदार निकाल लिया है और रंग-बिरंगे पर्चीयों से पैसों की वसुली हो रही है।

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अविनाश चंद्र -8964006304 / 83195220243/रफीक अंसारी पटना कोरिया:-9770277040

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