बस्सु/ रफीक अंसारी/ कोरिया/.


पटना/एसईसीएल में अब अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए कार्यालयों में ठंडी हवा के लिए कुलर की व्यवस्था भी किराये से करने की प्रथा आरम्भ हो चुकी है। सभी कुछ ठेकाप्रथा के अधीन करने की ऐसी परम्परा चली है कि अब हर छोटी मोटी जरूरतें केवल ठेके से ही प्राप्त कर उनका उपयोग एसईसीएल करने का आदि हो चुका है। मजदूरों सहित वाहनों,एयर कंडीशनर, कम्प्यूटर, एवम फोटोकॉपी सहित अन्य कई आवश्यकताएं पहले ही ठेकाप्रथा के अधीन कर दी गईं थीं। एक समय था जब एसईसीएल अपनी व्यवस्थाओं के साथ चलकर भी सभी कुछ बेहतर कर पा रहा था लेकिन अब ऐसा क्या हुआ कि वह अपनी तरफ से अपने लिए व्यवस्था का जुगाड़ स्थाई रूप से करने की बजाय ठेके से उसे प्राप्त कर अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है। एसईसीएल की स्वयं द्वारा संचालित व्यवस्थाओं से एसईसीएल सहित अन्य लोगों को भी उसका लाभ मिल जाया करता था।
ञात हो कि पहले एसईसीएल के अस्पताल इतने सुविधा सम्पन्न हुआ करते थे कि एसईसीएल के अधिकारी कर्मचारियों के साथ आम लोग भी उन्ही अस्पतालों में अपना इलाज कराने उत्सुक रहा करते थे लेकिन एसईसीएल ने उन अस्पतालों की व्यवस्थाओं को भी धीरे धीरे कम करते हुए अपने अधिकारियों एवम कर्मचारियों के लिए निजी अस्पतालों से समझौता कर वहीं से उनके इलाज की व्यवस्था भी जारी कर दी जिससे अब एसईसीएल के पहले के जो अच्छे अच्छे अस्पताल थे वह केवल प्राथमिक इलाज के केंद्र बनकर रह गए हैं। आखिर क्या वजह है कि एसईसीएल को हर तरह से ठेकाप्रथा से ही संसाधनों की उपलब्धता पर ज्यादा विश्वास है, क्या उन्हें अपने द्वारा व्यवस्था संचालन का पुराना भरोसा अपने ऊपर नहीं है।विभिन्न आवश्यकताओं के लिए ठेके से जुटाए जा रहे संसाधनों में देखा जाय तो व्यय भी ज्यादा हो रहा है। ज्यादा खर्च करके एसईसीएल उन जरूरतों को भी पूरा करने की परम्परा शुरु कर चुका है जो उसे अपने द्वारा क्रय कर उपयोग में लाने पर बहोत ही कम लागत पर उपलब्ध हो सकता है।


एसईसीएल में कुलर की ठंडी हवा को भी किराये पर लेने के निर्णय पर लोगों के तरह तरह के बयान सामने आ रहें हैं। लोगों का कहना है कि एसईसीएल ने कुलर की ठंडी हवा को भी ठेके से प्राप्त करने का निर्णय अपनी मर्जी से नही लिया होगा।एसईसीएल ठेकेदारों के साथ इतना खुद को आदि बना चुका है कि ठेकेदारों के कहने पर ही उसने ऐसा निर्णय लिया होगा। एसईसीएल चाहता तो नए कुलर खरीद सकता था और उन कूलरों से वर्षों ठंडी हवा का आनंद भी ले सकता था लेकिन उसने ऐसा करने की बजाय कुलर किराये पर लेकर अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की सोची और उसे किराये पर उपलब्ध कराने का नियम बनाया। एसईसीएल में किसी भी संसाधन की उपलब्धता के लिए उसे ठेके पर देने का तीन वर्षों का समझौता नियम है, अब उनके चहेते ठेकेदार तीन साल तक एक कुलर से किराया वसूलते रहेंगे। कुछ लोगों का कहना है कि एसईसीएल ने कुलर तो किराये पर लेने का निर्णय ले लिया उसके लिए ठेका भी हो गया लेकिन नए कूलरों की जगह पुराने ही कुलर से ठेकेदार ठंडी हवा देने का प्रयास कर रहें हैं। ठेकेदारों द्वारा नए कुलर खरीदकर लगाने की बजाय पुराने कूलरों का जुगाड़ कर कार्यालयों में लगा दिया गया है। एसईसीएल आगे इन कूलरों में पानी डालने के काम को भी ठेके पर देगा ऐसा भी लोगों का कहना है।

blitz hindiके साथ जुड़े हर समाचार सबसे पहले और सटीक पाने के लिए | विज्ञापन के लिए संपर्क करेअविनाश चंद्र -8964006304 / 83195220243/रफीक अंसारी पटना कोरिया:-9770277040

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here