अविनाश चंद्र -8964006304

बैकुण्ठपुर : त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के शक्तियों को कांग्रेस प्रदेश सरकार ने क्षीण कर शक्तिविहीन कर दिया है।भारतीय जनता पार्टी ने जिसे सशक्त,संबल बनाया,उसे कांग्रेस सरकार ने सिर्फ अनुशंसा करने व आवेदन लिखने लायक ही बना दिया है।भाजयुमो युवा नेता श्री धीरजकुमार मौर्य ने कांग्रेस राज में कथनी और करनी में धरती और आसमान का फर्क बताया,उन्होनें आगे कहा कि पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण अंचल का रीढ का हड्डी है।ग्रामीण अंचल के प्रतिनिधि ही वास्तविक मायने में ग्रामीण परिवेश में ढल कर वहां के मूलभूत जरूरतों की पूर्ति के लिये कडी होते हैं।इसके बावजूद भी कांग्रेस सरकार ने ग्रामीण अंचल का अनदेखी करते हुये पंचायती राज व्यवस्था का हाथ खाली कर हाथ में सिर्फ कलम पकडा दिया है।जिससे न केवल जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन हुआ है,बल्कि दूरस्थ स्थानों में विकास रूक सा गया है। स्थानीय प्रतिनिधियों को मद विहीन बना चुकी प्रदेश सरकार के कारण ऐसे तमाम कमियां ज्यों का त्यों यथावत बदहाल स्थिति में पडी है। जिला पंचायत अध्यक्ष और जनपद पंचायत अध्यक्ष को वित्तीय अधिकार देने के लिए कांग्रेस ने अपने जन घोषणा पत्र में शामिल किया था परंतु सरकार बने 2 वर्ष होने जा रहे हैं कब तक पंचायत अध्यक्षों को वित्तीय अधिकार मिल पायेगा।
जिला पंचायत विकास निधि ,जनपद पंचायत विकास निधि,त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं का क्षमता विकास निधि, मुख्यमंत्री पंचायत व सशक्तिकरण योजना,हमर छत्तीसगढ़ योजना, के अतिरिक्त वर्ष में एक बार मिलने वाला अटल समरसता योजना, दीनदयाल जन्मसती समारोह से जिला और जनपद पंचायत को एकमुश्त राशि मिल जाया करता था जिससे पंचायत क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलता था। वर्तमान में यह सारे योजनाएं बन्द हो चुकी है।जिला और जनपद में अब स्वयं के मद के लिए कोई योजना नहीं है।भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गाँधी के स्वप्न पंचायती राज व्यवस्था को उन्ही की कांग्रेस पार्टी के सरकार द्वारा ध्वस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ा गया है।
प्रदेश सरकार के कुप्रबंधन का ही नतीजा है कि,प्रदेश सरकार को केन्द्र के योजनाओं के सहारे अपने काम को दिखाना पड़ रहा है।प्रदेश में नाममात्र की प्रदेश की योजनाएं संचालित हैं,बल्कि उनके हर योजनाओं को केन्द्र सरकार की योजनाएं ही ईंजन बन खींच रही है।समाचार पत्रों में सामुदायिक मवेशी आश्रय का वाहवाही बटोर रही कांग्रेस सरकार केन्द्र के मनरेगा के सहारे इसे संचालन कर पा रही है,तो वहीं अपशिष्ट कचरा घर भी केन्द्र सरकार के स्वच्छता मिशन का ही प्रदत्त मद है।हां यह जरूर है कि,प्रदेश सरकार गोबर खरीदने का काम कर रही है।जिसमें भी प्रदेश सरकार ने भेदभाव रवैय्या अपनाई है।अलग अलग पंचायतों में गौठान के अलग अलग रूप देखने को मिलता है।तो कई जगह निर्माणाधीन है।तो कई जगह भूमि पूजन के लिये क्षेत्रीय विधायक का बाट जोही जा रही है।”कब बाबा मरे?कब बैल बिके?” जैसी हालात पंचायतों में निर्मित हो चुकी है।कब सामुदायिक मवेशी आश्रय बने तो कब गोबर बेचेंगें,किसान? जिला/जनपद प्रमुखों से भी अगर ग्रामीण किसी मांग को पूरा करने हाथ जोडता है।तो उसे निराशा ही हाथ लगती है।आखिर सरकार की व्यवस्था कब सुधरेगी,कब फिर से पंचायती राज व्यवस्था फिर सुदृढ होगी,कब जिला/जनपद प्रमुखों को अपने क्षेत्रों के लिये दूसरों का मुंह ताकना बंद करना होगा?

blitz hindi
के साथ जुड़े हर समाचार सबसे पहले और सटीक पाने के लिए | विज्ञापन के लिए संपर्क करे
अविनाश चंद्र -8964006304 / 83195220243/रफीक अंसारी पटना कोरिया:-9770277040

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here