अविनाश चंद्र की खबर

छत्तीसगढ़/छत्तीसगढ़ पुलिस के 2018 बैच के दो दर्जन डीएसपी पिछले 5 महीने से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद से बेकार बैठे हुए हैं। राज्य पुलिस अकादमी द्वारा इस बैच के 24 डीएसपी को प्रदेशभर के अलग-अलग जिलों में ट्रेनी पुलिस अफसर के रूप में पदस्थ किया था। प्रोबेशनल अफसर रहते सभी ने एक साल तक कार्य किया।
बताया जाता है कि प्रोबेशनल पीरियड खत्म होने के बावजूद इनकी पोस्टिंग नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि 2018 बैच के दो डीएसपी पारूल अग्रवाल और प्रशांत खांडे को ही फील्ड में पदस्थापना मिली है। पारूल को बिलासपुर में खुफिया तंत्र में तो खांडे को सूरजपुर में पदस्थ किया गया है। महज दो डीएसपी की पोस्टिंग कर राज्य सरकार बचे हुए अधिकारियों की तैनाती को भूल गई है। प्रदेशभर के विभिन्न जिलों में इस बैच के कम से कम दो-दो अधिकारी ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि नई पदस्थापना नहीं होने से इस बैच के डीएसपी बेहद परेशान हैं। जिलों में उन्हें काम भी नहीं दिया जा रहा है। इसके पीछे वजह है कि किसी मामले में जांच अधिकारी बनाए जाने की सूरत में अचानक पदस्थापना सूची जारी होने से पुलिस अधीक्षकों की परेशानी बढ़ सकती है।
बताया जा रहा है कि नए दायित्व के लिए डीएसपी पूरी तरह से तैयार हैं। फील्ड में पोस्टिंग को लेकर इस बैच के डीएसपी एसपी के माध्यम से अब आलाधिकारियों को पत्र भी भेज रहे हैं। बताया जा रहा है कि 2018 बैच के डीएसपी फिलहाल जिलों में बिना काम के भटक रहे हैं। राज्य पुलिस अकादमी और पुलिस प्रशासन के अफसरों के दखल से ही सभी को पोस्टिंग मिलेगी।

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