(बस्सु) रफ़ीक अंसारी कोरिया/ पटना।

साल 2010 से 2014 के बीच यूपीए-2 के दौरान भाजपा पेट्रोल, डिजल के बढ़ते दामों से निजात दिलाने के लिये धुआंधार विरोध किया था उस समय पेट्रोल की किमत 70 रूपये प्रतिलिटर रही और पेट्रोल व डिजल का बीच 10 रूपये का अंतर था। जिस पर बीजेपी के लोगों ने जंतर-मंतर तक हिला दिया करते थे। वहीं केन्द्र में भाजपा की सरकार है और वर्तमान समय में पेट्रोल, डिजल के दाम सैकड़ा के आंकड़ा पर पहुंचने वाला है। बढ़ते दामों को लेकर कांग्रेस केन्द्र सरकार व बाबा रामदेव को घेरने लगी है। बढ़ते डिजल, पेट्रोल की किमतों से आम आदमी परेशान हो रहा है, किसान प्रभावित हो रहे है। फिर से डजल, पेट्रोल की किमतों को लेकर राजनीति शुरू हो गयी है और अब लोग सड़को पर ऊतर रहे है। कांग्रेस की प्रदेश सरकार के आहवाहन पर प्रधानमंत्री का पुतला दहन जगह – जगह किया गया।धरना प्रदर्शन के दौरान युवा निलेश पांडे ने कहा कि इस समय गाड़ी चलाना गाड़ी जलाने से ज्यादा आसान है। ऐसा लगता है कि वाहन मालिकों को इस समय अपनी वाहनों को जला देना चाहिए क्योंकि डिजल, पेट्रोल की किमतों में ईजाफा से अब लोग अपनी गाड़ीयों के टंकी फूल कराने की स्थिति निर्मित नहीं हो पा रही है। मिडिल क्लास फैमिली में खाने के बजट से पहले पेट्रोल का बजट बनाना पड़ता है जिससे वह अपनी दिनचर्या में शामिल पेट्रोल, डिजल के बोझ को वहन कर सकें। क्योंकि यह पेट्रोलियम पदार्थ आम लोगों के जीवन से जुड़ी हुयी है।निलेश पाण्डेय ने कहा 100 रूपये किलो प्याज हमारा रोना निकाल देता था और अब 100 रूपये के करीब पहुंचा पेट्रोल डीजल आम लोगों को परेशान कर रहा है। इस सरकार का मानना है कि जिसके पास गाड़ी है वह गरीब कहां से है पर मोदी जी इस बात को भूल गए कि गरीब और अमीर के बीच एक कैटेगरी आती है जो मिडिल क्लास है और वह टैक्स भी भरता है, कार चलाता है और कभी-कभी भूखा सोता है। फिर महिने के प्रथम दिवस को अपनी सैलरी के लिए वैसे ही नजरों से इंतजार करता है कि पूरे महिने कैसे अपनी जरूरतों को पूरा करेगा। आज बढ़ते पेट्रोलियम के बढ़ते दाम से आम लोग अपनी जरूरतों से कम में गुजारा करके पेट्रोल व डिजल में व्यय कर रहे है।विनोद शर्मा ने कहा कि सभी न्यू इंडिया के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं पर न्यू इंडिया में पेट्रोल और डीजल के दाम ऐसे ही रहे तो ऐसा ना हो कि इनकम टैक्स वाले के छापे पड़ जायें क्योंकि इस बढ़ती महंगाई में वही लोग टिक सकते है जिनके पास जरूरत से अधिक धन है। इस महंगाई में ऐसा न हो कि वाहन चालाते समय इंकम टैक्स का छापा भी पड़ जायl

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