पत्थलगांव। डेढ़ माह बाद खुली मदिरा की दुकानों में मद्यप्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी। लोग मदिरा की एक-एक बोतल के लिए घंटों लाइन में खड़े रहकर मशक्कत करते नजर आए। हालांकि शराब कोचियाओं ने अपने गुर्गों की मार्फत सर्वाधिक पसंद की जाने वाली अधिकांश शराब पर कब्जा जमा लिया और कई लोगों को निराश लौटना पड़ा। 

उल्लेखनीय है कि कोरोना के चलते देशव्यापी लाॅकडाउन का असर मदिरा की दुकानों पर भी पड़ा था। देश भर में शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। 4 मई को सरकार ने मदिरा दुकानों के दरवाजे मदिरा प्रेमियों के लिए एक बार फिर खोल दिए। डेढ़ माह बाद मिली इस छूट में शराब खरीदने के लिए लोगों की भारी भीड़ मदिरा की दुकानों में उमड़ पड़ी। शराब दुकान के खुलने का समय जिला प्रशासन द्वारा दोपहर 12 से 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। परंतु शराब खरीदने के लिए लोगों में इस कदर जुनून देखने को मिला कि लोग निर्धारित समय से काफी देर पहले ही दुकानों में पहुंचकर लाइन लगाने लगे थे। दुकान के खुलने से पहले ही दुकानों के सामने लंबी लाइन लग चुकी थी। शहर के कई संभ्रांत लोग भी इस कतार में खड़े नजर आए। दुकान खुलने के बाद लोगों की धड़कनें तेज हो गईं। हालांकि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई परंतु लोगों का यह मदिरा प्रेम शहर में चर्चा का विषय बन गया है। 

कोचियों ने समेटी महंगी शराब

शराब दुकानों को मिली छूट का लाभ लेने के लिए कोचिए सर्वाधिक सक्रिय नजर आए। उल्लेखनीय है कि शहर में कई शराब कोचिए सक्रिय हैं जो शासकीय दुकान से कम दामों पर खरीदने के बाद शराब को महंगे दामों पर सप्लाई करते हैं। डेढ़ माह से चल रही बंदी से इनके धंधे भी बंद पड़े हुए थे। इसलिए छूट मिलने पर कोचियों ने सर्वाधिक खपत वाली शराब को अपने कब्जे में समेट लेने की तैयारी कर रखी थी। उल्लेखनीय है मैकडाॅनल्ड नं 1,आरसी, इंपीरियल ब्लू और ब्लाइंडर जैसे कुछ ब्रांड सर्वाधिक प्रचलित माने जाते हैं। शहर में इन ब्रांड के शराब पीने वाले व्यक्तियों की खासी संख्या है। प्रति व्यक्ति दी जाने वाली शराब की मात्रा निर्धारित होने के कारण कोचिए जहां खुद भी लाइन में खड़े थे वहीं उन्होंने अपने कई कई गुर्गों को लाइन में खड़ा कर रखा था। सोशल डिस्टेंस के मद्देनजर शराब की निर्धारित मात्रा में वृद्धि का लाभ भी कोचियों ने खूब उठाया और गुर्गों के मार्फत इन चार ब्रांड की अधिकांश शराब पर कब्जा जमा लिया। आलम यह रहा कि दुकान बंद होने से काफी पहले ही इन चारों ब्रांड की शराब खत्म हो गई। मशहूर ब्रांड पर कब्जा जमा लेने से जहां कोचियों को पौ-बारह हो गई है वहीं कई लोगों को मजबूरन अन्य ब्रांड से ही संतोष करना पड़ा। 

सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां

शराब दुकानों को खोलने की छूट मिलने के पहले ही दिन सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती नजर आईं। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा जारी की गई गाइड लाइन में सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत दो लोगों के बीच की शारीरिक दूरी को कम से कम 6 फीट बनाए रखना आवश्यक है। परंतु शहर की इकलौती शराब दुकान में इन निर्देशों की धज्जियां उड़ती नजर आईं। दुकान खुलने से पहले लोगों ने थोड़ी-बहुत दूरी अवश्य बना रखी थी परंतु दुकान खुलते ही आपा-धापी मच गई। प्रत्येक व्यक्ति अपने हिस्से की शराब हासिल करने को व्याकुल नजर आ रहा था। आपाधापी के बीच लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को ताक पर रख दिया। 6 फीट तो दूर लोग आम दिनों की भंाति एक दूसरे से बिल्कुल सटकर खड़े नजर आए। पुलिस के कर्मचारी भी यहां खड़े नजर आए परंतु वे भी आम लोगों की भांति भीड़ का हिस्सा बनकर रह गए। कई लोगों ने तो मास्क भी नहीं पहन रखे थे परंतु पुलिसकर्मियों का ध्यान इस ओर भी नहीं गया। 

‘‘बेची गई शराब की कुल रकम का हिसाब अभी पूरा नहीं हो सका है। अनुमानतः 5 लाख रू की शराब बिकी होगी। आम दिनों में 1.5 से 2 लाख रू की बिक्री होती है वहीं त्यौहारी दिनों में भी 4 से 5 लाख तक की शराब बिक जाती है। कुछ असामाजिक तत्वों के कारण सोशल डिस्टेंसिंग में समस्या उत्पन्न हो रही थी। पुलिस की मदद से डिस्टेंसिंग का पालन कराया गया।‘‘

 

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